एक संवाददाता
डिब्रूगढ़: पाँच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम (एफडीपी) के पहले दिन डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय में दिगंत बिस्वा सरमा द्वारा भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) पर एक व्याख्यान दिया गया। सत्र का उद्देश्य प्रतिभागियों को वर्तमान शिक्षा में आईकेएस के मूल विचारों और प्रासंगिकता से परिचित कराना था।
शर्मा ने विज्ञान, दर्शन, नैतिकता और शिक्षा जैसे क्षेत्रों को कवर करते हुए पारंपरिक भारतीय ज्ञान की समृद्ध और विविध प्रकृति पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देकर कहा कि आईकेएस केवल अतीत के बारे में नहीं है, बल्कि आधुनिक शैक्षणिक प्रथाओं में भी सार्थक योगदान दे सकता है।
उन्होंने आईकेएस के प्रति ऋषि अरविंद के योगदान को ध्यान में रखा और बताया कि यह आज की दुनिया में कैसे प्रासंगिक है। वक्ता ने शिक्षकों को ज्ञान के लिए अधिक समग्र दृष्टिकोण के लिए अपने शिक्षण और अनुसंधान में आईकेएस को एकीकृत करने के लिए प्रोत्साहित किया।
सत्र इंटरैक्टिव और सूचनात्मक था, जिसने एफडीपी में आगे की चर्चाओं के लिए टोन सेट किया।
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