एक संवाददाता
नुमालीगढ़: मानव-हाथी संघर्ष से गंभीर रूप से प्रभावित जिले गोलाघाट को नई घोषित 'गजमित्र योजना' से बाहर रखे जाने के बाद विवाद छिड़ गया है। असम बजट सत्र (2025-26) के दौरान शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य मानव-हाथी संघर्षों को कम करना है, लेकिन गोलाघाट की चूक ने तीखी आलोचना और सार्वजनिक आक्रोश को जन्म दिया है।
ग्वालपाड़ा, उदलगुरी, नगाँव, बाक्सा और सोनितपुर जैसे जिलों को इस योजना में शामिल किया गया था, लेकिन गोलाघाट के बहिष्कार ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। जिले की ग्रामीण आबादी लंबे समय से मानव-हाथी संघर्षों से पीड़ित है, लगातार विरोध प्रदर्शन स्थायी समाधान और प्रभावित किसानों के लिए पर्याप्त मुआवजे की माँग कर रहे हैं।
सत्र मुक्ति संग्राम समिति (एसएमएसएस) के केंद्रीय सहायक महासचिव पिंटू गोगोई ने इसे 'शर्मनाक और अस्वीकार्य' बताते हुए इसे बाहर किए जाने की निंदा की। उन्होंने वित्त मंत्री अजंता नेयोग पर आरोप लगाया कि वह अपने ही जिले के महत्वपूर्ण मुद्दों से अनजान हैं, जो उनकी 'असंवेदनशील राजनीति' को उजागर करती है।
आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार वर्षों में मानव-हाथी संघर्ष में 33 लोग और 35 हाथी मारे गए हैं। मरंगी, खुमताई, नुमलीगढ़ और तेंगनी जैसे क्षेत्रों में इस तरह की घटनाओं में खतरनाक वृद्धि देखी जा रही है, हाथियों के हमले के कारण मरंगी में 10,000 बीघा से अधिक खेत बंजर हो गए हैं।
एसएमएसएस ने चेतावनी दी है कि अगर गोलाघाट को बजटीय संशोधन के माध्यम से योजना में शामिल नहीं किया गया तो भाजपा के नेतृत्व वाली असम सरकार और वित्त मंत्री अजंता नेयोग के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन होंगे। तनाव बढ़ने के साथ ही आने वाले दिनों में गोलाघाट को बाहर करना एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिजुमोनी दास (एसएमएसएस गोलाघाट जिला समिति के सांस्कृतिक सचिव), तपन दास (एसएमएसएस मरांगी क्षेत्रीय समिति के अध्यक्ष), प्रणबज्योति बोरा (सचिव), और अन्य प्रमुख पदाधिकारी शामिल थे।
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