स्टाफ रिपोर्टर
गुवाहाटी: मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) और श्रम न्यायालयों के पास मुआवजे की राशि के संदर्भ में स्वत संज्ञान रिट याचिका (सिविल) में भारत के सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसरण में, गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 166 (1) के तहत दावा आवेदन दायर करते समय सामग्री विवरणों का प्रकटीकरण सुनिश्चित करने के लिए कुछ अभ्यास निर्देश जारी किए। (घ) जहाँ कोई निदष्ट एमएसीटी नहीं है, वहाँ एमएसी मामलों की सुनवाई करने वाले एमएसीटी/न्यायालयों को 1988 में संशोधित किया गया है।
गुवाहाटी उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल ने हाल ही में जारी एक अधिसूचना में कहा, 'याचिकाकर्ताओं को घायल व्यक्तियों या क्षतिग्रस्त संपत्ति के मालिक के नाम और पते (स्थानीय और स्थायी दोनों), उनके आधार और पैन विवरण और ईमेल आईडी (यदि कोई हो) दर्ज करानी होगी। उन्हें दुर्घटना के मृतक पीड़ितों के सभी कानूनी प्रतिनिधियों के नाम और पते, जो मुआवजे का दावा कर रहे हैं, उनके आधार और पैन विवरण और ईमेल आईडी, यदि कोई हो, तो भी देना होगा।
अधिसूचना में कहा गया है कि याचिकाकर्ताओं द्वारा मांगी गई जानकारी नहीं देने के आधार पर आवेदन के पंजीकरण से इनकार नहीं किया जाएगा। तथापि, एमएसी मामलों को लेने वाले एमएसीटी/न्यायालय जहाँ कोई निदष्ट एमएसीटी नहीं है, नोटिस जारी करते समय इस सूचना को प्रस्तुत करने का निदेश दे सकते हैं।
मुआवजा प्रदान करने का अंतरिम अथवा अंतिम आदेश पारित करते समय एमएसीटी/न्यायालय मुआवजा प्राप्त करने के हकदार व्यक्ति अथवा व्यक्तियों से अनुरोध करेंगे कि वे बैंक खातों के सभी ब्यौरे देते हुए बैंकर से प्रमाण-पत्र के साथ अपने बैंक खाते का ब्यौरा प्रस्तुत करें।
अधिसूचना ने कई अन्य निर्देश भी दिए हैं जो भुगतान मुआवजे को आसान बनाते हैं।
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