आरोपों के चलते 56 मंडल निलंबित
स्टाफ रिपोर्टर
गुवाहाटी: राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री केशव महंत ने सोमवार को राजस्व मंडल कार्यालयों के मंडलों को चेतावनी दी कि वे सार्वजनिक सेवा को प्राथमिकता दें, क्योंकि कोई भी शिकायत मिलने पर उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। अब तक 56 मंडलों को उनके खिलाफ विभिन्न आरोपों के चलते निलंबित किया जा चुका है।
सोमवार को दिसपुर में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री महंत ने कहा, "हाल ही में मैंने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग का कार्यभार संभाला है। मैं राज्य के मंडलों से बात करूंगा। मंडल कार्यालयों में पहले से ही कुछ सुधार किए गए हैं, और कुछ और पाइपलाइन में हैं। मंडलों की प्राथमिकता सार्वजनिक सेवा प्रदान करना होनी चाहिए। यदि कोई आवेदन लंबित रह गया है, तो कार्रवाई की जाएगी। सभी आवेदनों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना चाहिए। अब तक 56 मंडलों को उनके खिलाफ विभिन्न आरोपों के लिए निलंबित किया गया है।"
मिशन बसुंधरा 3.0 के बारे में मंत्री ने कहा, "मिशन बसुंधरा का मुख्य उद्देश्य राज्य के मूल निवासियों को भूमि अधिकार देना है। मिशन बसुंधरा 3.0 के तहत असम सरकार शैक्षणिक संस्थानों, नामघरों, धर्मस्थलों जैसे धार्मिक संस्थानों, सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों आदि को भूमि बंदोबस्त देने की योजना बना रही है। अब तक मिशन बसुंधरा 3.0 के तहत 10,475 आवेदन प्राप्त हुए हैं। मैं उन संगठनों को आमंत्रित करता हूँ जिन्होंने अभी तक आवेदन नहीं किया है कि वे 31 दिसंबर, 2024 तक ऐसा करें। यदि किसी संगठन ने अपना पंजीकरण नहीं कराया है, तो उन्हें आवेदन प्रक्रिया के दौरान पंजीकरण प्रमाण पत्र जमा करने की आवश्यकता नहीं है। वे भूमि बंदोबस्त प्रस्ताव प्राप्त करते समय ऐसे प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "यदि कोई संगठन पंजीकृत है, लेकिन उसने अपने पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं कराया है, तो वह बिना किसी विलम्ब जुर्माने के अपना नवीनीकरण करा सकता है।"
मिशन बसुंधरा 3.0 के तहत आवेदन करने के लिए संगठनों को अपने पंजीकरण का नवीनीकरण प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा। अब नवीनीकरण में देरी के लिए उन्हें कोई विलम्ब जुर्माना नहीं देना होगा।
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि लोग अब अपने भू-राजस्व (खजाना) का भुगतान ऑनलाइन मोड में और सीधे मौजादारों या तहसीलदारों को कर सकते हैं। राज्य सरकार ने हाल ही में ई-खजाना प्रणाली शुरू की थी, लेकिन कई लोग इस मोड का लाभ नहीं उठा पाए क्योंकि ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसलिए, सरकार ने खज़ाना के भुगतान के लिए दोनों प्रणालियों को जारी रखने का फैसला किया है।
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