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असम में खीलोंजिया वंशजों को मिलेगा भूमि अधिकार, मुख्यमंत्री सरमा का बड़ा ऐलान

वन अधिनियम के तहत पारंपरिक भूमि दावों को मिलेगी कानूनी मान्यता, मूल निवासी समुदायों को होगा सीधा लाभ।

Sentinel Digital Desk

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य में खीलोंजिया (मूल निवासी) समुदाय के वंशजों को वन अधिनियम के तहत भूमि अधिकार प्रदान करने की घोषणा की है। यह कदम पारंपरिक भूमि दावों को औपचारिक मान्यता देने और स्वदेशी समुदायों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कई पीढ़ियों से वन क्षेत्रों और पारंपरिक भूमि पर रह रहे खीलोंजिया परिवारों को अब वैध दस्तावेज और मालिकाना हक मिलेगा। इससे न केवल उनकी आजीविका सुरक्षित होगी, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्थिरता भी मजबूत होगी।

सरकार के अनुसार, यह निर्णय विशेष रूप से उन समुदायों के लिए महत्वपूर्ण है जो लंबे समय से भूमि अधिकारों के अभाव में सरकारी योजनाओं और वित्तीय लाभों से वंचित रहे हैं। भूमि का कानूनी अधिकार मिलने के बाद वे बैंक ऋण, आवास योजनाओं और अन्य विकास कार्यक्रमों का लाभ उठा सकेंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा, “यह कदम पारंपरिक भूमि दावों को मान्यता देने और राज्य के स्वदेशी तथा वन-निवासी समुदायों को सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से उठाया गया है। इससे लंबे समय से अपने पैतृक क्षेत्रों में रह रहे समुदायों को जमीन पर वैध अधिकार मिलेगा और उनकी पहचान व आजीविका सुरक्षित होगी।”

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय असम की भूमि नीति और स्वदेशी अधिकारों के संदर्भ में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

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