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असम में बड़ा अतिक्रमण विरोधी अभियान, श्रीभूमि में 660 हेक्टेयर वन भूमि खाली

अधिकारियों के अनुसार, ईशरपार, माधबपुर, बालिया, मधुरबोंड, छागलमाया, मगुरा और जोगीसोरा जैसे गांवों में नोटिस जारी किए गए।

Sentinel Digital Desk

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि श्रीभूमि ज़िले में चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत पिछले दो दिनों में 660 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। उन्होंने बताया कि अभी 220 हेक्टेयर और भूमि खाली कराई जानी बाकी है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (x) पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि यह अभियान सरकार के वन भूमि संरक्षण के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

उन्होंने लिखा, “इतना ज़बरदस्त अतिक्रमण विरोधी अभियान कि रिंकीया के पापा भी इसे मंज़ूरी देंगे। श्रीभूमि में पिछले दो दिनों में 660 हेक्टेयर भूमि मुक्त कराई गई — 220 हेक्टेयर और साफ़ की जानी है। यह अभियान लगातार जारी है।”

श्रीभूमि में चलाया जा रहा यह अभियान हाल ही में हैलाकांडी ज़िले में किए गए इसी तरह के अभियान के बाद शुरू हुआ है। वन विभाग ने पाथरकांडी विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आरक्षित वन भूमि पर कथित रूप से अवैध रूप से रह रहे लगभग 1,000 परिवारों को बेदखली नोटिस जारी किए थे।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, ईशरपार, माधबपुर, बालिया, मधुरबोंड, छागलमाया, मगुरा और जोगीसोरा सहित कई गांवों में ये नोटिस जारी किए गए। नोटिस में निवासियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर वन भूमि खाली करने का निर्देश दिया गया था।

नोटिस जारी होने के बाद कई प्रभावित परिवारों ने अपने घर स्वयं तोड़ना शुरू कर दिया और अन्य स्थानों पर स्थानांतरित होने की तैयारी करने लगे। कई निवासियों का कहना है कि वे दशकों से इस क्षेत्र में रह रहे हैं और पहले कभी प्रशासन की ओर से कोई आपत्ति नहीं जताई गई थी।

इस अभियान को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता भी बढ़ी है। उनका कहना है कि उनके पास कोई वैकल्पिक भूमि नहीं है और न ही पुनर्वास की कोई व्यवस्था की गई है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि कार्रवाई के दौरान उनकी स्थिति को ध्यान में रखा जाए।

पिछले महीने हैलाकांडी ज़िले के दक्षिणी वन क्षेत्रों में भी इसी तरह का अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया था, जहां अधिकारियों ने अवैध कब्जे वाली वन भूमि को खाली कराने की बात कही थी।

श्रीभूमि में चल रहे इस अभियान के साथ राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि आरक्षित वन क्षेत्रों की रक्षा के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

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