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माणिक साहा ने शिक्षा में नैतिक मूल्यों पर दिया ज़ोर, त्रिपुरा में स्कूल ब्लॉक व पुल परियोजनाओं का शुभारंभ

उन्होंने इस पर बल दिया कि सार्थक शिक्षा के लिए नैतिक अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी अत्यंत आवश्यक हैं।

Sentinel Digital Desk

अगरतला: यह जोर देते हुए कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बुधवार को कहा कि छात्रों को शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ मजबूत नैतिक मूल्यों को भी अपनाना चाहिए, क्योंकि शिक्षा का उद्देश्य समाज और राष्ट्र दोनों की सेवा करना है।

फटीकरॉय विधानसभा क्षेत्र में स्थित पीएम-श्री हाजीबाड़ी कक्षा 12 विद्यालय की नव-निर्मित दोमंज़िला इमारत का उद्घाटन करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिकों के निर्माण के लिए मूल्य-आधारित शिक्षा अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नैतिक अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी सार्थक शिक्षा के अभिन्न अंग हैं।

मुख्यमंत्री साहा ने कहा, “जब शिक्षा नैतिकता से जुड़ी होती है, तब वह ऐसे व्यक्तियों का निर्माण करती है जो सामूहिक कल्याण के लिए कार्य करते हैं।” उन्होंने इसे प्रगतिशील समाज की आधारशिला बताया।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने मनु नदी पर कुमारघाट के सैदरपार और सरदापल्ली को जोड़ने वाले पुल की आधारशिला भी रखी। लगभग 1.26 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पुल क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इसके अलावा, उन्होंने विद्यालय परिसर में आयोजित छठे मिलन मेला–2026 का औपचारिक उद्घाटन भी किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पुल से क्षेत्र में रहने वाले लगभग 6,000 से 7,000 लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा, विशेष रूप से कृषि कार्य से जुड़े लोगों को। उनके अनुसार, किसानों को अपने उत्पाद कुमारघाट बाजार तक आसानी से पहुंचाने में सुविधा होगी, जिससे उनकी आजीविका में सुधार आएगा।

उन्होंने कहा, “इससे कुमारघाट रेलवे स्टेशन तक पहुंच भी अधिक सुगम होगी, जिससे स्थानीय निवासियों की आवाजाही बेहतर होगी।”

कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में त्रिपुरा में अपराध दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के कारण महिलाएं अब देर रात तक भी बिना किसी भय के आवागमन कर पा रही हैं।

उन्होंने कहा, “यह वास्तविक विकास का संकेत है।”

शिक्षा क्षेत्र में सुधारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार कक्षाओं को अधिक रोचक और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित उपाय अपना रही है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत पर्सनलाइज़्ड एडैप्टिव लर्निंग (पीएएल) जैसी पहलों के क्रियान्वयन का उल्लेख किया, जिससे विभिन्न प्रकार की सीखने की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कहा, “शिक्षा समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाती है, और हम संस्थानों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करते हैं।” उन्होंने बताया कि त्रिपुरा में सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों के माध्यम से उच्च शिक्षा प्रणाली को मजबूत किया गया है।

उन्होंने चिकित्सा शिक्षा में हुए विकास का भी उल्लेख किया और कहा कि मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या बढ़ाई गई है तथा अंबासा में एक नए मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ हमारा ध्यान छात्रों में नैतिक मूल्यों के समावेश पर भी बना हुआ है।”

इस अवसर पर अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री सुधांशु दास, युवा मामले एवं खेल मंत्री टिंकू रॉय, उनाकोटी जिला परिषद अध्यक्ष अमलेन्दु दास, जिलाधिकारी तमाल मजूमदार, पुलिस अधीक्षक सुदांबिका आर., कुमारघाट पंचायत समिति अध्यक्ष सुमति दास सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।