शिलांग: मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने मंगलवार को कहा कि मेघालय ने 400 से अधिक नियमों को समाप्त कर अपने व्यापारिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है। वे यहां स्टेट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित रिवर्स बायर–सेलर मीट (आरबीएसएम) 2026 के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ये सुधार व्यवस्थाओं को सरल बनाने और उद्यमियों तथा निवेशकों की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से किए गए हैं।
उन्होंने कहा- “मेघालय ने कारोबारी माहौल को सहयोग देने के लिए बड़े सुधार किए हैं। इनमें 400 से अधिक नियमों को हटाना—जिनमें से करीब 70 श्रम क्षेत्र से जुड़े थे—और निर्बाध मंजूरियों के लिए एकीकृत निवेशक पोर्टल की शुरुआत शामिल है।”
उन्होंने आगे कहा - “हम जैसे छोटे राज्य के लिए निरंतर प्रयास और निरंतरता बेहद जरूरी है। बदलाव रातोंरात नहीं होता, लेकिन स्पष्ट लक्ष्य और केंद्रित प्रयासों से परिवर्तन संभव है।”
नियामक सुधारों के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए संगमा ने कहा कि विशेष रूप से श्रम क्षेत्र में पुराने और आपस में दोहराव वाले नियमों को हटाने से व्यवसायों के लिए अधिक अनुकूल माहौल तैयार हुआ है।
उन्होंने बताया कि यूनिफाइड इन्वेस्टर पोर्टल से मंजूरी प्रक्रियाएं सरल हुई हैं और पारदर्शिता बढ़ी है, जिससे उद्यमों के लिए सरकारी सेवाओं और बाजार के अवसरों तक पहुंच आसान हुई है।
वैश्विक व्यापार रुझानों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अनिश्चितता के दौर भी अवसर लेकर आते हैं, खासकर वस्त्र, परिधान, हस्तशिल्प, चमड़ा, जूते-चप्पल और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आरबीएसएम जैसी पहल का लाभ किसानों, एमएसएमई और उद्यमियों तक ठोस रूप में पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कहा - “मुद्दा यह नहीं है कि हम क्या देखते हैं, बल्कि यह है कि हम उसे किस नजरिए से देखते हैं।”
मुख्यमंत्री ने मूल्य संवर्धन के उदाहरण भी प्रस्तुत किए। उन्होंने अनानास किसानों का जिक्र किया, जिनकी उपज अब अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों को पूरा करने के बाद निर्यात की जा रही है, साथ ही हल्दी प्रसंस्करण से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों का भी उल्लेख किया।
भागीदारी आधारित विकास पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि उद्देश्य खरीदारों को किसानों और उद्यमियों से दीर्घकालिक सहयोग के माध्यम से जोड़ना है, और इन्हें उन्होंने “इस कार्यक्रम के असली नायक” बताया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मेघाराइज़ का लोगो और ब्रांड, साथ ही राज्य स्तरीय एमएसएमई पोर्टल का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य ब्रांडिंग को मजबूत करना, दृश्यता बढ़ाना और पूरे राज्य के उद्यमियों के लिए डिजिटल पहुंच को सुगम बनाना है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री स्नियावभालांग धर ने कहा कि रिवर्स बायर–सेलर मीट पारंपरिक व्यापार मेलों से अलग है, क्योंकि इसे खरीदार-केंद्रित मंच के रूप में डिजाइन किया गया है, जो संरचित बिजनेस-टू-बिजनेस सहभागिता पर केंद्रित है।
उन्होंने बताया कि इस आयोजन में 16 देशों से 28 अंतरराष्ट्रीय खरीदार और मेघालय के विभिन्न क्षेत्रों से 100 से अधिक एमएसएमई विक्रेता भाग ले रहे हैं, जिनमें कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, हथकरघा एवं हस्तशिल्प, फैशन एवं वस्त्र, बांस और लकड़ी आधारित उत्पाद, मसाले तथा हर्बल और वेलनेस उत्पाद शामिल हैं।
मुख्य सचिव डॉ. शकील पी. अहमद ने कहा कि यह मंच स्थानीय उद्यमियों और वैश्विक खरीदारों के बीच सीधे संवाद को संभव बनाता है। उन्होंने बताया कि मेघालय गुणवत्ता पर जोर देते हुए प्रीमियम और निचे सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित करता है, जहां उत्पादन प्रक्रियाएं मुख्य रूप से जैविक और टिकाऊ हैं।
इससे पहले, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के आयुक्त एवं सचिव संजय गोयल ने कहा कि भारत के कुल निर्यात का लगभग 45 प्रतिशत योगदान एमएसएमई क्षेत्र का है। उन्होंने माना कि फिलहाल मेघालय का योगदान अपेक्षाकृत कम है, लेकिन इस क्षेत्र में मजबूत विकास क्षमता मौजूद है।
उन्होंने बताया कि आरबीएसएम का उद्देश्य सीधे बाजार संपर्क स्थापित करना है और इसमें लगभग 300 एमएसएमई प्रतिनिधि, जिनमें करीब 200 सक्रिय विक्रेता शामिल हैं। उन्होंने गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग, नियामकीय अनुपालन और निर्यात के लिए तैयारियों में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (एफआईईओ) की प्रतिनिधि नेहा मेहरा ने कहा कि आरबीएसएम एमएसएमई को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। नीति आयोग के एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि मेघालय की रैंकिंग सुधरकर 27वें स्थान पर पहुंच गई है और उन्होंने क्षमता निर्माण व निर्यात जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए राज्य को सहयोग देने के लिए एफआईईओ की प्रतिबद्धता दोहराई।
दो दिवसीय रिवर्स बायर–सेलर मीट 2026 का आयोजन 4 फरवरी को भी जारी रहेगा, जिसमें मेघालय के एमएसएमई और विदेशी खरीदारों के बीच संरचित बिजनेस-टू-बिजनेस बैठकें होंगी।
यह आयोजन मेघालय सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग द्वारा फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशंस (एफआईईओ) के सहयोग से, भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की आरएएमपी (रेजिंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस) योजना के तहत किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र में उपमुख्यमंत्री एवं वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के प्रभारी मंत्री स्नियावभालांग धर, मुख्य सचिव डॉ. शकील पी. अहमद, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, एफआईईओ के प्रतिनिधि, 16 देशों से आए विदेशी खरीदार और स्थानीय एमएसएमई उपस्थित रहे।