आइजोल: मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने मंगलवार को कहा कि मिजोरम ने अपने विकास एजेंडे के केंद्र में लोगों के स्वास्थ्य को रखा है और मिजोरम यूनिवर्सल हेल्थ केयर स्कीम (एमयूएचसीएस) को देश के सबसे प्रभावी सार्वजनिक स्वास्थ्य मॉडल में से एक बताया।
यहां फॉकलैंड पार्क में आयोजित दो दिवसीय नॉलेज एक्सचेंज हेल्थ कॉन्क्लेव का उद्घाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एमयूएचसीएस के तहत पैनल में शामिल अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से मरीजों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिल रही है, जिससे परिवारों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ काफी हद तक कम हुआ है।
उन्होंने कहा,
“स्वास्थ्य समग्र विकास की नींव है और हमारी सरकार ने इसे हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। एमयूएचसीएस के जरिए हमने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि पैसों की कमी के कारण किसी भी नागरिक को इलाज से वंचित न रहना पड़े।”
हाल के वर्षों में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य भर में जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का व्यापक उन्नयन किया गया है।
उन्होंने कहा कि उन्नत चिकित्सा उपकरणों की खरीद और नई स्वास्थ्य पहलों की शुरुआत से, विशेषकर दूरदराज़ के इलाकों में, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इनमें से कई सुधार मिजोरम हेल्थ सिस्टम्स स्ट्रेंथनिंग प्रोजेक्ट (एमएचएसएसपी) के माध्यम से संभव हो पाए हैं।
विश्व बैंक और केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य अवसंरचना के आधुनिकीकरण में उनके सहयोग की अहम भूमिका रही है।
उन्होंने कहा,
“एमएचएसएसपी ने नीतिगत इरादों को ज़मीन पर दिखाई देने वाले परिणामों में बदलने में हमारी मदद की है।”
मुख्यमंत्री ने इस कॉन्क्लेव को समयानुकूल और महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह देशभर से आए स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों के बीच विचारों के सार्थक आदान-प्रदान का मंच बनेगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि कॉन्क्लेव के दौरान होने वाली चर्चाएं बेहतर रणनीतियों, गहरी समझ और राज्यों के बीच मजबूत सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेंगी।
इस अवसर पर उन्होंने परियोजना की यात्रा को दर्शाने वाली एक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया।
स्वास्थ्य मंत्री पी. लालरिनपुईई ने कहा कि एमएचएसएसपी के तहत बेहतर उपकरणों और संसाधनों के प्रभावी उपयोग से चिकित्सा सुविधाओं में ठोस सुधार हुआ है।
उन्होंने बताया कि इन प्रयासों के चलते मिजोरम के स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय स्तर के गुणवत्ता प्रमाणन भी प्राप्त हुए हैं।
एमएचएसएसपी की परियोजना निदेशक डॉ. लिली छकछुआक ने जानकारी दी कि यह परियोजना 2021 में विश्व बैंक की वित्तीय सहायता से शुरू की गई थी, जिसकी कुल लागत 280 करोड़ रुपये है और इसके मार्च 2026 में पूरा होने की संभावना है।
उन्होंने बताया कि परियोजना के पांच विकास उद्देश्यों में से चार पहले ही हासिल किए जा चुके हैं और शेष लक्ष्य भी जल्द पूरे होने की उम्मीद है।
इस कॉन्क्लेव में तेलंगाना, असम, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु सहित कई राज्यों के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के साथ-साथ गेट्स फाउंडेशन और नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल के प्रतिनिधि भी भाग ले रहे हैं।