अगरतला: त्रिपुरा के मुख्यमंत्री मणिक साहा ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं का संरक्षण और हिंदी का प्रचार एक साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भाषाएं लोगों के बीच पुल का काम करें, विभाजन का नहीं।
यह बात उन्होंने शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय इंडोर एक्ज़िबिशन सेंटर, हापानिया में आयोजित पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और उत्तरी क्षेत्रीय राजभाषा सम्मेलन में कही, जिसका उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया।
मुख्यमंत्री साहा ने बताया कि त्रिपुरा को इस सम्मेलन के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यह केंद्रीय गृह मंत्री की पहल थी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन सभी हितधारकों को भाषाई सद्भाव को मजबूत करने के लिए प्रेरित करेगा।
भाषा के शासन में महत्व पर जोर देते हुए साहा ने कहा कि हिंदी ने सरकार और जनता के बीच संचार को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि हिंदी का प्रचार बढ़ता रहे, लेकिन क्षेत्रीय भाषाएं भी उसी तरह विकसित हों।
साहा ने कहा, "एक व्यापक रूप से समझी जाने वाली भाषा सरकार और जनता के बीच मजबूत संबंध बनाने में मदद करती है, और इसमें हिंदी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकारी लाभ हर नागरिक तक समान रूप से पहुंचें ताकि सभी बराबरी से कवर हों। भारत कई भाषाओं का देश है और हिंदी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में एक एकीकृत कड़ी के रूप में काम करती है। साथ ही, स्थानीय भाषाओं का संरक्षण और हिंदी का प्रचार एक साथ आगे बढ़ना चाहिए।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्देश्य किसी एक भाषा को हावी होने देना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हिंदी के प्रसार के साथ-साथ स्थानीय भाषाएं भी जीवंत बनी रहें।
साहा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में भारतीय भाषाओं और संस्कृत के विकास पर नया जोर दिया जा रहा है।
भाषाई विविधता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ी की तुलना में हिंदी का शब्दकोश बहुत विशाल है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने शिक्षा में मातृभाषाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया है।
साहा ने यह भी बताया कि त्रिपुरा में हिंदी बोलने और समझने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
सम्मेलन में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार, सांसद राजीब भट्टाचार्य, बिप्लब कुमार देब और कृति सिंह देबबर्मा के साथ वरिष्ठ अधिकारी और जनता के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।
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