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पूर्वोत्तर समाचार

1 मार्च से गुवाहाटी के नए पुल पर वाहनों की आवाजाही शुरू; भारी वाहनों पर लगेगा टोल

नए अत्याधुनिक पुल पर 1 मार्च से शुरू होगा यातायात, गौरिपुर ट्रंपेट इंटरचेंज के निर्माण कार्य के चलते जून तक आईआईटी गुवाहाटी मार्ग से होगी प्रवेश-निकास, भारी वाहनों पर टोल लागू।

Sentinel Digital Desk

गुवाहाटी: गुवाहाटी, 11 फरवरी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मंगलवार को घोषणा की कि उत्तर गुवाहाटी और दक्षिण गुवाहाटी को जोड़ने वाले नवनिर्मित पुल पर 1 मार्च से वाहनों का संचालन शुरू होगा। हालांकि, गौरिपुर इंटरचेंज पर चल रहे निर्माण कार्य के कारण जून तक अस्थायी यातायात व्यवस्था लागू रहेगी।

मीडिया से बातचीत में सरमा ने बताया कि पुल का आधिकारिक प्रारंभिक बिंदु गौरिपुर है, लेकिन गौरिपुर स्थित ट्रंपेट इंटरचेंज का निर्माण कार्य जारी होने के कारण फिलहाल वाहनों की आवाजाही आईआईटी गुवाहाटी के रास्ते से होगी।

उन्होंने कहा, “1 मार्च से नए पुल पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो जाएगी, लेकिन गौरिपुर में ट्रंपेट निर्माण कार्य पूरा होने तक जून तक राजमार्ग से कनेक्टिविटी आंशिक रूप से डायवर्ट रहेगी।”

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इंटरचेंज का कार्य पूरा होने के बाद गौरिपुर ही पुल का स्थायी प्रारंभिक बिंदु होगा। तब तक प्रवेश और निकास आईआईटी गुवाहाटी के माध्यम से संचालित किए जाएंगे।

सरमा ने यह भी बताया कि पुल का उपयोग करने वाली बसों और ट्रकों से टोल टैक्स लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और फैंसी बाजार जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में संभावित जाम की स्थिति को रोकने के लिए लिया गया है।

उन्होंने कहा, “यदि बसों और ट्रकों की आवाजाही बिना नियमन के होगी तो फैंसी बाजार और शहर के अन्य हिस्सों में भारी जाम लग सकता है। अन्य निजी वाहनों पर कोई टोल नहीं लगाया जाएगा।”

इस बीच, पूर्ण रूप से वाहनों का संचालन शुरू होने से पहले अगले 15 दिनों तक यह पुल केवल पैदल यात्रियों के लिए खुला रहेगा, ताकि आम लोग इस नए ढांचे का अनुभव कर सकें।

गुवाहाटी और उत्तर गुवाहाटी को जोड़ने वाला यह अत्याधुनिक पुल प्राचीन कामरूप के राजा कुमार भास्कर वर्मा के नाम पर रखा गया है। इसका उद्घाटन 14 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाना प्रस्तावित है।

लगभग 1.24 किलोमीटर लंबा यह पुल करीब 3,300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है और इसे असम के प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है।

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