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कन्वर्जेंस मॉडल: ईस्ट खासी हिल्स में नियमित टीकाकरण को मजबूत करने और ज़ीरो-डोज़ एजेंडा को समर्थन देने के लिए पायलट पहल शुरू

Sentinel Digital Desk

भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के ज़ीरो-डोज़ एजेंडा को समर्थन देने के लिए ‘कम्युनिटी ऑफ़ प्रैक्टिस फ़ॉर डिमांड’ ने ईस्ट खासी हिल्स के उपायुक्त की अध्यक्षता में जिले में एक पायलट पहल शुरू की है। लॉन्च कार्यक्रम में स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण समेत विभिन्न विभागों के वरिष्ठ जिला अधिकारी शामिल हुए।

माइलियम और मावकिनरेव ब्लॉक में लागू किए जा रहे इस पायलट का उद्देश्य नियमित टीकाकरण सेवाओं की मांग बढ़ाना और समुदाय-केंद्रित कन्वर्जेंस के माध्यम से ज़ीरो-डोज़ और आंशिक रूप से टीकाकृत बच्चों की पहचान और फॉलो-अप में मदद करना है।

लॉन्च और जिला कन्वर्जेंस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग, अन्य संबंधित विभागों, हितधारकों और राज्य के कार्यान्वयन साझेदारों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में कन्वर्जेंस आधारित कार्रवाई की आवश्यकता पर प्रस्तुति दी गई। ‘कम्युनिटी ऑफ़ प्रैक्टिस फ़ॉर डिमांड’ टीम ने परिवारों, फ्रंटलाइन वर्करों और समुदायों के साथ टीकाकरण को लेकर बातचीत में मदद के लिए तैयार किए गए स्थानीय संदर्भ के अनुरूप कम्युनिकेशन टूल भी पेश किए।

अपने मुख्य भाषण में ईस्ट खासी हिल्स के उपायुक्त श्री अभिलाष बरनवाल ने ज़ीरो-डोज़ एजेंडा को आगे बढ़ाने और समुदाय स्तर पर कार्रवाई मजबूत करने में कन्वर्जेंस और सामूहिक जिम्मेदारी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने चुनौतियों की पहचान करने और पायलट पहल तैयार करने में ‘कम्युनिटी ऑफ़ प्रैक्टिस फ़ॉर डिमांड’ टीम के जमीनी कार्य और रिसर्च की सराहना की। उन्होंने पुरुषों की भागीदारी के पहलू को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि इससे प्रयासों को मजबूत करने में मदद मिलेगी। उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से सहयोग का भरोसा दिलाया।

कार्यक्रम में अतिरिक्त उपायुक्त श्री एफ. बी. बासन, राज्य टीकाकरण अधिकारी सुश्री विभा आर. मारक और जिला टीकाकरण अधिकारी श्री रैपबोर लालू समेत अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। चर्चा के दौरान प्रतिभागियों को सुझाव देने और मौजूदा प्लेटफॉर्म व कार्यक्रमों की पहचान करने का अवसर मिला, जो पायलट प्रोजेक्ट में मदद कर सकते हैं।

यह पायलट इस सिद्धांत पर आधारित है कि नियमित टीकाकरण से छूटे बच्चों तक पहुंचने के लिए केवल स्वास्थ्य व्यवस्था से अधिक प्रयासों की आवश्यकता है। इसका उद्देश्य सरकारी विभागों, फ्रंटलाइन वर्करों, स्कूलों, सामुदायिक संस्थाओं, परिवारों और स्थानीय प्रभावशाली लोगों को एक साथ लाना है, ताकि कमियों की पहचान, भरोसा मजबूत, फॉलो-अप बेहतर और समय पर पूर्ण टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सके।

यह मॉडल पांच आपस में जुड़े क्षेत्रों के माध्यम से लागू किया जाएगा—छूटे हुए बच्चों और परिवारों की पहचान करना, स्थानीय रूप से उपयुक्त व्यवहार परिवर्तन साधनों के जरिए परिवारों और समुदायों को जोड़ना, टीकाकरण प्रक्रिया में सहायता करना, मौजूदा सिस्टम और संबंधित लोगों को जोड़ना तथा कार्यान्वयन के दौरान सीख लेकर जरूरी बदलाव करना।

कार्यक्रम में ‘कम्युनिटी ऑफ़ प्रैक्टिस फ़ॉर डिमांड’ द्वारा तैयार स्थानीय संदर्भ के अनुरूप कम्युनिकेशन टूल्स और संसाधनों का प्रदर्शन भी किया गया। साथ ही पायलट टीम के साथ विस्तृत चर्चा हुई।

यह पायलट अगले 6-8 महीनों में लागू किया जाएगा। ईस्ट खासी हिल्स से मिली सीख टीकाकरण की मांग को मजबूत करने के लिए समुदाय-केंद्रित तरीकों को बेहतर बनाने में मदद करेगी।

‘कम्युनिटी ऑफ़ प्रैक्टिस फ़ॉर डिमांड’ के बारे में

‘कम्युनिटी ऑफ़ प्रैक्टिस फ़ॉर डिमांड जनरेशन’ एक रणनीतिक पहल है, जो भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को बच्चों के टीकाकरण की मांग बढ़ाने में मदद करती है। जीएवीआई के सहयोग और स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की देखरेख में डब्ल्यूपीपी मीडिया और यूएनडीपी द्वारा संचालित ‘कम्युनिटी ऑफ़ प्रैक्टिस फ़ॉर डिमांड’ विभिन्न हितधारकों के साथ मिलकर ज़ीरो-डोज़ यानी एक भी टीका नहीं लगे बच्चों और आंशिक रूप से टीकाकृत बच्चों की समस्या से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर उपयुक्त तरीकों को विकसित और परीक्षण करता है।