स्टाफ रिपोर्टर
गुवाहाटी: यह चिंता का विषय है कि राज्य में वक्फ बोर्ड के तहत 1,200 बीघा से अधिक भूमि अतिक्रमण की चपेट में है। अतिक्रमण के तहत ऐसी भूमि का उच्चतम क्षेत्र धुबरी में है, और सबसे कम जोरहाट में है।
अल्पसंख्यक कल्याण एवं विकास विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक धुबरी में करीब 951 बीघा, कछार में 217 बीघा, कामरूप (मेट्रो) में 43 बीघा, हैलाकांडी में 14 बीघा, तिनसुकिया में 1 बीघा और जोरहाट में 1.12 बीघा वक्फ जमीन अतिक्रमणाधीन है। इन स्थानों पर अतिक्रमित भूमि का कुल क्षेत्रफल 1,225 बीघा है। जिला प्रशासन वक्फ की जमीन से अतिक्रमण हटाने का प्रयास कर रहा है।
सूत्रों ने कहा कि असम वक्फ बोर्ड के तहत संपत्तियों की संख्या लगभग 2,654 है। इन संपत्तियों में अनुमानित 20,000 बीघा भूमि शामिल है। इस जमीन का अधिकतम क्षेत्रफल न्यूनतम किराए पर लीज पर दिया गया है। पिछले तीन वर्षों में, बोर्ड ने अपने तहत संपत्तियों से केवल 1.16 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बोर्ड का कार्यकाल सितंबर 2017 में समाप्त हो गया था लेकिन नये बोर्ड का पुनर्गठन होना बाकी है। इसके अलावा, 1996 के बाद से बोर्ड के अधीन भूमि का कोई सर्वेक्षण नहीं किया गया है। इसी का नतीजा है कि अल्पसंख्यक कल्याण एवं विकास विभाग के पास बोर्ड के अधीन जमीन का सही आंकड़ा नहीं है।
हालाँकि जिला प्रशासन कह रहा है कि वे वक्फ भूमि से अतिक्रमण हटाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं और ऐसा करने के लिए हाल ही में बनाए गए वक्फ अधिनियम के तहत प्रावधान भी हैं, लेकिन यह काम इतना आसान नहीं है। गुवाहाटी में वक्फ बोर्ड के तहत भूमि का अधिकतम क्षेत्र फैंसी बाजार, कुमारपारा और भांगागढ़ के वाणिज्यिक केंद्रों में स्थित है। यदि इन जमीनों से अतिक्रमण हटाने का प्रयास किया जाता है, तो राज्य में आर्थिक व्यवस्था प्रभावित होगी। यह भी चिंताजनक है कि इस बारे में कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आती है कि भूमि पट्टे पर कब दी गई या क्षेत्रों का सीमांकन कब किया गया। पट्टेदारों का एक वर्ग कानूनी दृष्टि से किरायेदार है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वे वास्तव में मालिक हैं। इसलिए उन्हें जमीन से बेदखल करना आसान नहीं होगा।
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