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असम: बजटीय व्यय के लिए समय दिशा-निर्देशों का पालन नहीं कर रहे विभाग

बजट में आवंटित राशि को समय पर खर्च करने के लिए वित्त विभाग ने दिशा-निर्देश तैयार किए थे, लेकिन विभिन्न कारणों से विभाग उनका पालन नहीं कर रहे हैं।

Sentinel Digital Desk

स्टाफ रिपोर्टर

गुवाहाटी: बजट में आवंटित राशि को समय पर खर्च करने के लिए वित्त विभाग ने दिशा-निर्देश तैयार किए थे, लेकिन विभिन्न कारणों से विभाग उनका पालन नहीं कर रहे हैं।

दिशा-निर्देशों के अनुसार, वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून तक विभागों को आवंटित राशि का 20% खर्च करना होता है। जुलाई से सितंबर तक संबंधित विभागों को 30% खर्च करना होता है। फिर अक्टूबर से दिसंबर तक विभागों को 30% खर्च करना होता है और जनवरी से मार्च तक शेष 20% खर्च करना होता है।

आम तौर पर विभागों में यह चलन रहा है कि वे साल भर में अधिकांश राशि खर्च नहीं करते और फिर वित्तीय वर्ष के आखिरी महीनों में उसे खर्च करने की जल्दी में रहते हैं। वित्तीय वर्ष के अंत में आवंटित राशि के इस तरह बेतहाशा खर्च से वित्तीय रूप से अराजक स्थिति पैदा होने की संभावना है।

चालू वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक देखा गया है कि आवंटित धनराशि का औसतन केवल 32% ही खर्च किया गया है, जबकि दिशा-निर्देशों में 50% से अधिक धनराशि खर्च करने का प्रावधान है।

निधि का आवंटन दो मदों में किया जाता है; एक वेतन और अन्य व्यय, जबकि दूसरा विकास कार्यों के लिए। विकास कार्यों के लिए निधि के घटक के लिए दिशा-निर्देश बनाए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि 31 अक्टूबर तक राज्य पर्यटन विभाग ने 8%, गुवाहाटी विकास विभाग ने 17%, कौशल विकास विभाग ने 17%, पहाड़ी क्षेत्र विकास ने 5%, अल्पसंख्यक विकास ने 28%, उद्योग और निगमों ने 4% आदि खर्च किए हैं।

सूत्रों ने बताया कि विकास कार्यों के लिए आवंटित धनराशि अलग-अलग योजनाओं के लिए तय होती है। बजट पारित होने के बाद विभागों को विशेष योजनाओं का अनुमान तैयार करना होता है। इन्हें मंजूरी के लिए वित्त विभाग को भेजा जाता है। मंजूरी मिलने के बाद ये तकनीकी अनुभाग में जाते हैं। तकनीकी अनुभाग द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद टेंडर जारी किए जाते हैं। अपने संसाधनों से काम का एक हिस्सा पूरा करने के बाद ठेकेदार पार्ट-बिल जमा करते हैं और विभाग बिल को भुगतान के लिए वित्त विभाग को भेज देता है।

सूत्रों का आरोप है कि वित्त विभाग द्वारा विभिन्न प्रकार के प्रश्न पूछकर योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति में देरी की जाती है। कई बार तकनीकी विभाग भी स्वीकृति में देरी करता है। इससे काफी समय बर्बाद होता है और योजनाओं का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन भी विलंबित होता है। योजनाओं की स्वीकृति में देरी होने से प्रारंभिक कार्य में देरी होती है और विभाग निर्धारित राशि को समय पर खर्च नहीं कर पाता। यह एक दुष्चक्र है जिसके कारण विकास परियोजनाएँ समय पर पूरी नहीं हो पातीं।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि जब कोई योजना स्वीकृति के लिए प्रस्तुत की जाती है, तो उसे अनिवार्य विस्तृत जाँच से गुजरना पड़ता है और पूछताछ की जाती है। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो योजना को मंजूरी मिल जाती है। कई बार विभागों को अपनी योजनाएँ समय पर प्रस्तुत करने के लिए याद दिलाना पड़ता है। इस वित्तीय वर्ष में लोकसभा चुनाव के कारण योजनाओं में देरी हुई और लंबी बरसात के कारण भी योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा आई। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार का बजटीय व्यय रिकॉर्ड अच्छा रहा है, उन्होंने बताया।

वित्त मंत्री अजंता नेयोग ने 2024-25 के लिए राज्य बजट के बारे में बात करते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2022-23 में बजटीय व्यय बढ़कर 1.27 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जबकि वित्त वर्ष 2015-16 में यह 41,931 करोड़ रुपये था। मंत्री ने कहा कि पूंजीगत व्यय वित्त वर्ष 2015-16 में 2,951 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2022-23 में 16,338 करोड़ रुपये हो गया है।