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असम: फर्जी और डुप्लिकेट प्रविष्टियों के कारण 2019 से 8.66 लाख से अधिक मनरेगा जॉब कार्ड रद्द किए गए

यह विचारणीय विषय है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 से अब तक असम में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस) के तहत 8.66 लाख से अधिक जॉब कार्ड हटा दिए गए हैं। यह तथ्य राज्य सभा में उस समय उजागर हुआ जब ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने सांसद मुकुल बालकृष्ण वासनिक द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में लिखित उत्तर प्रस्तुत किया।

Sentinel Digital Desk

गुवाहाटी: यह विचारणीय विषय है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 से अब तक असम में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस) के तहत 8.66 लाख से अधिक जॉब कार्ड हटा दिए गए हैं। यह तथ्य राज्यसभा में तब उजागर हुआ जब ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने सांसद मुकुल बालकृष्ण वासनिक द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में लिखित उत्तर प्रस्तुत किया।

मंत्री द्वारा किए गए खुलासे के अनुसार, जॉब कार्ड इसलिए हटाए गए क्योंकि उनमें फर्जी जॉब कार्ड, डुप्लिकेट जॉब कार्ड और ऐसे मामले थे जहां परिवार काम करने के लिए तैयार नहीं थे, आदि।

सदन के समक्ष एक लिखित बयान में, मंत्री ने कहा, “योजना का कार्यान्वयन राज्य की जिम्मेदारी है, और महात्मा गांधी नरेगा में उचित कार्यान्वयन के लिए कई प्रावधान दिए गए हैं। जॉब कार्डों का सत्यापन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाने वाला एक नियमित अभ्यास है। जॉब कार्ड को उचित सत्यापन के बाद केवल तभी रद्द या हटाया जा सकता है जब वे: (i) फर्जी जॉब कार्ड (गलत जॉब कार्ड), (ii) डुप्लिकेट जॉब कार्ड, (iii) काम करने के लिए इच्छुक नहीं परिवार, (iv) ग्राम पंचायत से स्थायी रूप से स्थानांतरित परिवार, और (v) जॉब कार्ड में एकल व्यक्ति हों और उस व्यक्ति की मृत्यु हो गई हो।”

मंत्री के जवाब में वित्तीय वर्षवार कार्ड हटाए जाने की संख्या भी शामिल थी। असम राज्य के लिए, वित्त वर्ष 2019-20 में 65,703 कार्ड हटाए गए; 2020-21 में 96,628 कार्ड थे; 2021-22 में 76,257 थे; 2022-23 में यह संख्या 1,57,919 थी; 2023-24 में कुल 2,83,042 थे; और 2024-25 (आज तक) में 1,86,849 जॉब कार्ड हटाए गए। इसलिए, वित्त वर्ष 2019-20 से असम में कुल 8,66,398 एमजीएनआरईजीएस जॉब कार्ड हटाए गए।

राज्य पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के एक सूत्र ने बताया कि मनरेगा के तहत जॉब कार्डों की प्रामाणिकता निर्धारित करने के लिए जमीनी स्तर पर निगरानी की जाती है। कई मामलों में देखा गया कि जिस व्यक्ति के नाम पर कार्ड जारी किया गया था, उसकी मृत्यु हो चुकी है। वहीं, कुछ मामलों में यह भी देखा गया कि जॉब कार्ड तो मौजूद हैं, लेकिन कार्डधारकों ने लंबे समय से काम नहीं किया है। जॉब कार्ड हटाने के पीछे ये और अन्य कारण हैं।

केंद्रीय राज्य मंत्री ने उन अन्य राज्यों का भी उल्लेख किया, जहां मनरेगा जॉब कार्ड हटाए गए हैं, साथ ही वित्तीय वर्ष के अनुसार हटाए गए कार्डों की संख्या भी बताई।