

स्टाफ रिपोर्टर
गुवाहाटी: अखिल असम बिजली उपभोक्ता संघ (एएईसीए) ने एपीडीसीएल के उस प्रस्ताव का विरोध किया है जिसमें आधी रात से सुबह 6 बजे तक बिजली शुल्क को 'रात', सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक 'सौर' और शाम 5 बजे से आधी रात तक 'पीक ऑवर्स' के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उपभोक्ता संगठन ने बिजली शुल्क के इस समय-आधारित वर्गीकरण को जनविरोधी करार दिया है।
एएईसीए के संयोजक अजय अचार्जी ने कहा, "मुख्यमंत्री ने उपभोक्ताओं को इस साल अप्रैल से बिजली दरों में कटौती का आश्वासन दिया है। हालांकि, वर्ष 2025-26 के लिए बिजली दरों का समय-दिन वर्गीकरण एक अलग कहानी कहता है। भले ही प्रस्ताव में बिजली दरों में बढ़ोतरी के बारे में कुछ नहीं कहा गया है, लेकिन अगर यह प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है, तो इससे बिजली दरों में तेजी से वृद्धि होगी। आम उपभोक्ता शाम 5 बजे से आधी रात तक अधिक बिजली का उपयोग करते हैं। एपीडीसीएल ने इस अवधि को पीक ऑवर के रूप में लिया है और अधिकतम टैरिफ 9.62 रुपये प्रति यूनिट है। इससे उपभोक्ताओं को ठगा जाएगा। बिजली बाजार को उत्पाद नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि यह आधुनिक सभ्यता की प्रेरक शक्ति है। अब तक, कई सरकारी सेवाओं का निजीकरण किया जा चुका है। इससे बाजार की मांग के आधार पर मूल्य निर्धारण हुआ है और एपीडीसीएल ने भी यही रास्ता चुना है। यह बिजली को सेवा के बजाय लाभ-आधारित उत्पाद के रूप में देखने की साजिश है। बिजली से राजस्व की विशेषताओं को बरकरार रखने की जरूरत है। हम एपीडीसीएल से आग्रह करते हैं कि वह अपने टाइम-ऑफ-डे बिजली टैरिफ प्रस्ताव को रद्द करे, साथ ही स्मार्ट मीटर को खत्म करे।"
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