

स्टाफ रिपोर्टर
गुवाहाटी: गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) और मोटर दुर्घटना दावों (एमएसी) से निपटने वाले न्यायालयों को जिला और तालुका कानूनी सेवा प्राधिकरणों और पैरालीगल स्वयंसेवकों की सहायता से बड़े पैमाने पर अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है ताकि उन व्यक्तियों के ठिकाने का पता लगाया जा सके जिन्हें मुआवजा प्राप्त करने का हकदार माना गया है, लेकिन उन्होंने मुआवजा नहीं लिया है।
उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एमएसीटी और न्यायालय को केवल उन क्षेत्रों में इस अभियान का संचालन सुनिश्चित करना चाहिए जहाँ कामगार मुआवजा अधिनियम, 1923 के तहत नामित एमएसीटी और आयुक्त नहीं हैं।
गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने एमएसीटी और न्यायालयों को यह निर्देश भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 22 अप्रैल, 2025 को एक स्वतः संज्ञान रिट याचिका (सिविल) में पारित एक आदेश के अनुसरण में जारी किया।
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