

गुवाहाटी: असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वास सरमा और केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की मौजूदगी में आज यहां खानपारा में कृष्णगुरु अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक युवा समाज के 21वें द्विवार्षिक सम्मेलन में भाग लिया।
सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल आचार्य ने प्रभु ईश्वर कृष्णगुरु की चिरस्थायी विरासत पर जोर दिया, जिन्होंने दशकों पहले असम में आध्यात्मिकता की नींव को मजबूत किया था। राज्यपाल ने कहा, "असम की पवित्र धरती पर प्रभु ईश्वर कृष्णगुरु द्वारा प्रज्वलित आध्यात्मिक प्रकाश अब पूर्वोत्तर सहित पूरी मानवता को प्रकाशित कर रहा है।"
आचार्य ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पारंपरिकता और आधुनिकता का मिश्रण भारत के शरीर का निर्माण करता है, लेकिन आध्यात्मिकता इसकी आत्मा बनी हुई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि 1974 में स्थापित कृष्णगुरु सेवाश्रम विभिन्न सामाजिक-शैक्षणिक पहलों के माध्यम से मानवीय मूल्यों को संरक्षित करने और बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "वोकल फॉर लोकल" अभियान के साथ तालमेल बिठाते हुए पारंपरिक बेल मेटल उद्योग में कारीगरों के कौशल को बढ़ाने में संस्थान की भूमिका की भी सराहना की।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि कृष्णगुरु प्रेमानंद प्रभु के मार्गदर्शन में युवा समाज जनसेवा का प्रतीक बनकर उभरा है, जिसने हजारों युवाओं को कल्याणकारी गतिविधियों में शामिल किया है। राज्यपाल ने राष्ट्र निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा, "हमारा भारत एक युवा देश है, और केवल युवा ही इसे विश्व गुरु बनाने की दिशा में आगे ले जाने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने युवाओं से 'राष्ट्र प्रथम' के संदेश को आगे बढ़ाने का भी आह्वान किया।
राज्यपाल ने प्रभु ईश्वर कृष्णगुरु की असाधारण आध्यात्मिक समझ और विश्व शांति तथा सार्वभौमिक भाईचारे के उनके संदेश को भी स्वीकार किया, जो दुनिया भर के लोगों को प्रेरित और आकर्षित करता है।
राज्यपाल आचार्य ने कहा कि सम्मेलन ने प्राचीन परंपराओं को आधुनिक प्रगति के साथ सम्मिश्रित करने के लिए संगठन की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया, जिसमें उपनिषदिक प्रार्थना "तमसो मा ज्योतिर्गमय" - अंधकार से प्रकाश की ओर यात्रा को मूर्त रूप दिया गया।
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