

गुवाहाटी: गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने असम सरकार को केंद्र की पीएम-डेवाइन योजना के तहत ‘मां कामाख्या मंदिर एक्सेस कॉरिडोर परियोजना’ को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। इससे नीलाचल पहाड़ी पर स्थित श्रद्धेय कामाख्या मंदिर के आसपास प्रस्तावित पुनर्विकास का मार्ग प्रशस्त हो गया है।
मुख्य न्यायाधीश अशुतोष कुमार और न्यायमूर्ति अरुण देव चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि परियोजना की संरचनात्मक डिजाइन से संबंधित प्रस्तुत सामग्री और रिपोर्टों में ऐसा कुछ नहीं है जिससे राज्य को निर्माण कार्य आगे बढ़ाने से रोका जाए।
खंडपीठ ने कहा कि यह परियोजना श्रद्धालुओं के लिए पहुंच सुगम बनाने और मंदिर परिसर में सुविधाओं को बेहतर करने के उद्देश्य से लाई गई है। अदालत ने आदेश में कहा, “संरचनात्मक डिजाइन में शामिल सभी शोध सामग्री और रिपोर्टों के मद्देनजर राज्य को मंदिरों को नया रूप देने तथा परिसर के भीतर स्थित मंदिरों तक श्रद्धालुओं की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निर्माण या परियोजना के क्रियान्वयन पर कोई रोक नहीं होनी चाहिए।”
यह मामला वर्ष 2024 में दायर दो अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से अदालत के समक्ष आया था। पहली याचिका गीतिका भट्टाचार्य और 12 अन्य द्वारा दायर की गई थी, जिसमें श्वेत पत्र जारी करने और यह सुनिश्चित करने की मांग की गई थी कि परियोजना से प्राचीन कामाख्या मंदिर, दशमहाविद्या मंदिरों, पवित्र गुफाओं और जलस्रोतों तथा नीलाचल पहाड़ी को कोई क्षति न पहुंचे।
दूसरी याचिका नवज्योति शर्मा द्वारा दायर की गई थी, जिसमें राज्य द्वारा जारी निविदा प्रक्रिया को चुनौती देते हुए प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्त्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 और असम प्राचीन स्मारक एवं अभिलेख अधिनियम, 1959 के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।
याचिका में कहा गया था कि परियोजना के कार्यान्वयन से मंदिर परिसर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और स्थापित धार्मिक परंपराएं बाधित हो सकती हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने लोक निर्माण (भवन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग) विभाग के विशेष आयुक्त एवं विशेष सचिव द्वारा शपथपत्र प्रस्तुत किया। इसमें कहा गया कि यह परियोजना पीएम-डेवाइन योजना के तहत मंदिर क्षेत्र के समग्र विकास की व्यापक योजना का हिस्सा है।
अदालत ने शपथपत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि समय के साथ मंदिर के अग्रभाग और आसपास का दृश्य अव्यवस्थित आवासीय और व्यावसायिक निर्माणों से प्रभावित हुआ है, जिन्होंने खुले स्थानों पर अतिक्रमण कर लिया है, जिन्हें श्रद्धालुओं की सुविधा या सार्वजनिक सुविधाओं के विकास के लिए उपयोग किया जा सकता था।
महाधिवक्ता डी. सैकिया ने अदालत को बताया कि परियोजना की परिकल्पना इस स्पष्ट समझ के साथ की गई है कि मंदिर की मूल संरचना या गर्भगृह के आसपास की प्राचीन मूर्तियों से कोई छेड़छाड़ नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार भूमिगत पवित्र जलस्रोतों पर संभावित प्रभाव को लेकर सजग है।
इन चिंताओं के समाधान के लिए सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान गुवाहाटी (आईआईटी गुवाहाटी) को प्रस्तावित निर्माण क्षेत्र में जलवैज्ञानिक और भूभौतिकीय अध्ययन करने के लिए नियुक्त किया है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परियोजना के क्रियान्वयन से मंदिर से जुड़े पवित्र भूमिगत जलस्रोतों को कोई क्षति न पहुंचे।
अदालत की अनुमति के साथ अब राज्य सरकार निर्धारित सुरक्षा उपायों और अध्ययनों के अधीन एक्सेस कॉरिडोर परियोजना के क्रियान्वयन को आगे बढ़ा सकती है।
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