

गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार राज्य में एक मजबूत औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि युवाओं को रोजगार के लिए बाहर पलायन न करना पड़े।
असम विधानसभा के बजट सत्र 2026 के दौरान बोलते हुए सरमा ने कहा कि राज्य की दीर्घकालिक दृष्टि सतत निवेश और औद्योगिक विकास के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा, “हमारी सरकार असम में मजबूत औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित कर रही है ताकि हमारे युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में न जाना पड़े और वे अपने घर पर ही अवसर प्राप्त कर सकें।”
पिछले वर्ष अक्टूबर में शुरू की गई श्रद्धांजलि योजना का उल्लेख करते हुए सरमा ने बताया कि यह पहल उन निवासियों के पार्थिव शरीर को वापस लाने के लिए शुरू की गई थी, जिनकी मृत्यु राज्य से बाहर हो जाती है।
उन्होंने सदन को बताया, “अक्टूबर में 30, नवंबर में 28, दिसंबर में 37, जनवरी में 41 और फरवरी में अब तक 4 लोगों के पार्थिव शरीर असम लाए गए हैं। अब तक कुल 122 पार्थिव शरीर राज्य में वापस लाए जा चुके हैं।” उन्होंने कहा कि इस योजना पर होने वाला खर्च मुद्दा नहीं है।
सरमा ने कहा कि इस योजना ने सरकार को यह सोचने पर मजबूर किया कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में युवा रोजगार के लिए राज्य से बाहर क्यों जा रहे हैं। उनके अनुसार, इनमें से कई युवा अडानी ग्रुप, रिलायंस इंडस्ट्रीज, हिंदुजा ग्रुप, द ओबेरॉय ग्रुप और टाटा ग्रुप जैसे बड़े व्यावसायिक समूहों में असम के बाहर कार्यरत हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का निवेश शिखर सम्मेलन ‘एडवांटेज असम 2.0’ अगले दो दशकों में 20 लाख करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य रखता है, जिससे राज्य में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकें।
उन्होंने कहा, “यदि रोजगार सृजन करने वाले उद्योग असम में निवेश करेंगे, तो हमारे बच्चों को राज्य छोड़कर नहीं जाना पड़ेगा। अन्यथा 12,000 रुपये की नौकरी के लिए उन्हें तेलंगाना या कर्नाटक जाना होगा, और हमें श्रद्धांजलि जैसी योजनाएं चलानी पड़ेंगी।”
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उद्योगों को मजबूत करना और निवेश आकर्षित करना आवश्यक है, ताकि असम के युवा अपने ही राज्य में अपना भविष्य बना सकें।
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