

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को 1 नवंबर 1984 को सिख विरोधी दंगों के दौरान सरस्वती विहार इलाके में पिता-पुत्र की हत्या के मामले में दोषी ठहराया।
विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा ने दोषसिद्धि आदेश सुनाया और सजा की अवधि पर बहस के लिए 18 फरवरी की तारीख तय की।
यह मामला दंगों के दौरान सरस्वती विहार इलाके में जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से जुड़ा है। इससे पहले 31 जनवरी को राउज एवेन्यू कोर्ट ने सरकारी वकील मनीष रावत की अतिरिक्त दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। दूसरी ओर, अधिवक्ता अनिल शर्मा ने दलील दी थी कि सज्जन कुमार का नाम शुरू से ही नहीं था और गवाह द्वारा उन्हें आरोपी के तौर पर नामित करने में 16 साल की देरी हुई। यह भी दलील दी गई कि सज्जन कुमार को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दोषी ठहराए जाने वाले एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित है।
अतिरिक्त लोक अभियोजक रावत ने प्रतिवाद करते हुए कहा कि आरोपी को पीड़िता नहीं जानती थी। जब उसे पता चला कि सज्जन कुमार कौन है, तो उसने अपने बयान में उसका नाम लिया।
इससे पहले दंगा पीड़ितों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एच.एस. फुल्का ने दलील दी थी कि सिख दंगों के मामलों में पुलिस जांच में हेराफेरी की गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस जांच धीमी है और आरोपियों को बचाने के लिए ऐसा किया गया है।
यह भी तर्क दिया गया कि दंगों के दौरान स्थिति असाधारण थी और इसलिए इन मामलों को इसी संदर्भ में निपटाया जाना चाहिए।
बहस के दौरान फुल्का ने दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया और कहा कि यह कोई अलग मामला नहीं था, यह एक बड़े नरसंहार का हिस्सा था। आगे यह भी तर्क दिया गया कि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1984 में दिल्ली में 2,700 सिख मारे गए थे।
वरिष्ठ अधिवक्ता फुल्का ने दिल्ली कैंट के 1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले का हवाला दिया था, जिसमें अदालत ने दंगों को "मानवता के खिलाफ अपराध" कहा था।
शुरू में पंजाबी बाग थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। बाद में न्यायमूर्ति जी.पी. माथुर समिति की सिफारिश पर गठित विशेष जाँच दल (एसआईटी) ने इस मामले की जांच की और आरोप पत्र दाखिल किया।
न्यायमूर्ति माथुर समिति ने 114 मामलों को फिर से खोलने की सिफारिश की थी। यह मामला उनमें से एक था।
16 दिसंबर, 2021 को अदालत ने आरोपी सज्जन कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 147, 148 और 149 के तहत दंडनीय अपराधों के साथ-साथ धारा 302, 308, 323, 395, 397, 427, 436 और 440 के साथ धारा 149 आईपीसी के तहत दंडनीय अपराधों के लिए आरोप तय किए। (आईएएनएस)
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