

स्टाफ रिपोर्टर
गुवाहाटी: राज्य सरकार को जनता के पैसे का बड़ा हिस्सा चूना लगाने वाले एक अधिकारी के वेतन में हर महीने 31,000 रुपये की कटौती की जाएगी। हैरानी की बात यह है कि राज्य सरकार को इस मामले में जुर्माना लगाने का फैसला लेने में पूरे 14 साल लग गए।
गुवाहाटी सदर के तत्कालीन सर्किल अधिकारी श्यामंता रवि बारा को 2009 में भूमि का अवैध म्यूटेशन करने के आरोपों के बाद जांच का सामना करना पड़ा था। 2010 में राजस्व विभाग के संयुक्त सचिव ललित गोगोई ने जांच शुरू की थी। उसी साल रिपोर्ट पेश की गई थी। इसमें कहा गया था, "सर्किल अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोप उचित संदेह से परे साबित हुए हैं।"
रिपोर्ट के आधार पर विभागीय कार्यवाही शुरू की गई। अगर कोई दलील थी तो वह भी पेश कर रहे थे। लेकिन उन्होंने कोई दलील पेश नहीं की। विभागीय कार्यवाही की प्रक्रिया काफी समय तक चलती रही।
अंत में 21 अक्टूबर 2024 को कार्मिक विभाग ने विभागीय कार्यवाही के निपटारे की घोषणा की और जुर्माना लगाया। कार्मिक विभाग के आदेश में कहा गया कि सरकार को 29.77 लाख रुपये के राजस्व की हानि हुई है, जिसकी वसूली अधिकारी के वेतन से 84 महीने में बराबर किस्तों में 31,000 रुपये की राशि काटकर की जाएगी। तथा शेष राशि अधिकारी की सेवानिवृत्ति के समय देय ग्रेच्युटी राशि से वसूली या समायोजित की जाएगी।
यह उन अनगिनत विभागीय कार्यवाहियों (डीपी) में से एक है जो बंद होने से पहले कई सालों तक चलती हैं। मौजूदा नियमों के अनुसार, ऐसी कार्यवाही को छह महीने की अवधि के भीतर बंद किया जाना चाहिए, लेकिन निगरानी तंत्र की कमी के कारण ऐसी डीपी समय पर निष्कर्ष पर पहुँचने में देरी करती है। यह भी आरोप लगाया जाता है कि इसमें शामिल दोनों पक्षों के बीच कुछ 'समझ' होती है, जो ऐसी डीपी को विलंबित या निरर्थक बना देती है।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि आरोपी अधिकारी के पास अपने खिलाफ डीपी में अनावश्यक देरी के मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाने की भी गुंजाइश है।
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