

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि सभी देशों का यह दायित्व है कि यदि उनके नागरिक वहां अवैध रूप से रह रहे पाए जाते हैं तो उन्हें वापस ले लिया जाए। उन्होंने कहा कि भारत सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए अमेरिकी सरकार के साथ बातचीत कर रही है कि निर्वासित लोगों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार न हो।
गुरुवार को राज्यसभा में अमेरिका द्वारा भारतीय नागरिकों के निर्वासन पर अपने बयान में जयशंकर ने कहा कि अमेरिका द्वारा निर्वासन का आयोजन और क्रियान्वयन आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) द्वारा किया जाता है और आईसीई द्वारा उपयोग किए जाने वाले विमान द्वारा निर्वासन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया 2013 से प्रभावी है। उन्होंने कहा कि 5 फरवरी को अमेरिका द्वारा की गई उड़ान के लिए पिछली प्रक्रियाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
जयशंकर ने कहा, "अमेरिका द्वारा निर्वासन का आयोजन और क्रियान्वयन आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) अधिकारियों द्वारा किया जाता है। आईसीई द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले विमान द्वारा निर्वासन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया 2012 से प्रभावी है। मैं दोहराता हूं, यह 2012 से प्रभावी है और इसमें प्रतिबंधों के उपयोग का प्रावधान है। हालांकि, हमें आईसीई द्वारा सूचित किया गया है कि महिलाओं और बच्चों को प्रतिबंधित नहीं किया जाता है। इसके अलावा, पारगमन के दौरान निर्वासित लोगों की भोजन और अन्य आवश्यकताओं से संबंधित जरूरतों, जिसमें संभावित चिकित्सा आपात स्थिति भी शामिल है, का ध्यान रखा जाता है। शौचालय ब्रेक के दौरान, यदि आवश्यक हो तो निर्वासित लोगों को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जाता है।"
उन्होंने कहा, "यह चार्टर्ड नागरिक विमानों के साथ-साथ सैन्य विमानों पर भी लागू होता है। 5 फरवरी 2025 को अमेरिका द्वारा की गई उड़ान के लिए पिछली प्रक्रियाओं में कोई बदलाव नहीं हुआ है, मैं फिर से दोहराता हूँ। हम अमेरिकी सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए संपर्क कर रहे हैं कि वापस लौटने वाले निर्वासितों के साथ उड़ान के दौरान किसी भी तरह का दुर्व्यवहार न हो। साथ ही, सदन इस बात की सराहना करेगा कि हमारा ध्यान अवैध प्रवास उद्योग पर कड़ी कार्रवाई करने पर होना चाहिए, जबकि वैध यात्रियों के लिए वीजा को आसान बनाने के लिए कदम उठाने चाहिए। एजेंटों और इसमें शामिल अन्य लोगों के बारे में वापस लौटने वाले निर्वासितों द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर, कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ आवश्यक निवारक और अनुकरणीय कार्रवाई करेंगी।"
अमेरिका में कथित रूप से अवैध रूप से प्रवास करने वाले भारतीय नागरिकों को लेकर अमेरिकी वायुसेना का विमान बुधवार को पंजाब के अमृतसर पहुँचा। अमृतसर में उतरे विमान में 104 भारतीय नागरिक सवार थे।
उन्होंने लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान को भारत और अमेरिका के बीच गहरे होते संबंधों का "आधार" बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गतिशीलता और प्रवासन इसकी गुणवत्ता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि अवैध रूप से गतिशीलता और प्रवासन से जुड़ी कई अन्य गतिविधियाँ भी अवैध प्रकृति की हैं।
जयशंकर ने कहा, "सदस्यगण जानते हैं कि लोगों के बीच आपसी आदान-प्रदान, संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ हमारे प्रगाढ़ होते संबंधों का आधार है। वास्तव में, किसी भी अन्य संबंध की तुलना में, गतिशीलता और प्रवासन ने इसकी गुणवत्ता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सदन सरकार के इस दृष्टिकोण से भी सहमत है कि वैध गतिशीलता को प्रोत्साहित करना और अवैध आवागमन को हतोत्साहित करना हमारे सामूहिक हित में है। वास्तव में, अवैध आवागमन और प्रवासन से जुड़ी कई अन्य गतिविधियाँ भी अवैध प्रकृति की हैं। इसके अलावा, हमारे करोड़ों नागरिक जो अवैध आवागमन में फँस गए हैं, वे स्वयं अन्य अपराधों का शिकार बन गए हैं, वे अमानवीय परिस्थितियों में आवागमन और काम करने में फँस गए हैं। सदस्यगण जानते हैं कि दुर्भाग्य से ऐसे अवैध प्रवासन के दौरान मौतें भी हुई हैं। जो लोग वापस लौटे हैं, उन्होंने भी अपने कष्टदायक अनुभवों की गवाही दी है।"
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि कोई देश अपने नागरिकों को अवैध रूप से विदेश में रहते हुए पाता है तो उसे उन्हें वापस बुलाना चाहिए। उन्होंने कहा, "यदि कोई देश अपने नागरिकों को अवैध रूप से विदेश में रहते हुए पाता है तो उसे वापस बुलाना सभी देशों का दायित्व है। यह स्वाभाविक रूप से उनकी राष्ट्रीयता के स्पष्ट सत्यापन के अधीन है। यह किसी विशेष देश पर लागू नीति नहीं है और न ही केवल भारत द्वारा अपनाई जाने वाली नीति है। यह अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में आम तौर पर स्वीकृत सिद्धांत है।"
2009 से निर्वासन की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए, विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, "सदस्यों को पता होगा कि निर्वासन की प्रक्रिया कोई नई नहीं है, मैं दोहराता हूँ कि यह कोई नई प्रक्रिया नहीं है, और यह कई वर्षों से चल रही है। मैं सदन के साथ 2009 से संयुक्त राज्य अमेरिका से निर्वासन का विवरण साझा करना चाहूँगा। हमारे कानून प्रवर्तन अधिकारियों के पास उपलब्ध वर्षों के अनुसार उनकी संख्या इस प्रकार है। 2009, निर्वासितों की संख्या 734, 2010, 799 2011, 597. 2012, 530, 2013, 515, 2014, 591, 2015, 708, 2016, 1303, 2017, 1024, 2018, 1180, 2019, 2042, 2020, 1889, 2021, 805, 2022, 862, 2023, 617, 2024, 1368, 2025, 104।"
इससे पहले मंगलवार को अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि हालाँकि विशिष्ट विवरण साझा नहीं किए जा सकते, लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका अपने सीमा और आव्रजन कानूनों को सख्ती से लागू कर रहा है। प्रवक्ता ने इस बात पर जोर दिया कि की गई कार्रवाइयों से "स्पष्ट संदेश जाता है कि अवैध प्रवास जोखिम के लायक नहीं है।"
अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, "मुझे भारत में निर्वासन उड़ान की रिपोर्ट पर कई पूछताछ मिली हैं। मैं उन पूछताछ के बारे में कोई विवरण साझा नहीं कर सकता, लेकिन मैं रिकॉर्ड पर साझा कर सकता हूँ कि संयुक्त राज्य अमेरिका अपनी सीमा पर सख्ती से निगरानी कर रहा है, आव्रजन कानूनों को सख्त कर रहा है और अवैध प्रवासियों को हटा रहा है। ये कार्रवाइयाँ एक स्पष्ट संदेश देती हैं: अवैध प्रवास जोखिम के लायक नहीं है।" (एएनआई)
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