गुवाहाटी: मंत्री अशोक सिंघल को आखिरकार लोगों की परेशानी का एहसास हुआ

अंततः, आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री अशोक सिंघल को इस बात का एहसास हो गया है कि जलापूर्ति पाइप बिछाने के लिए यहां-वहां अंधाधुंध गड्ढे खोदने से आम लोगों को असुविधा हो रही है।
गुवाहाटी: मंत्री अशोक सिंघल को आखिरकार लोगों की परेशानी का एहसास हुआ
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स्टाफ रिपोर्टर

गुवाहाटी: आखिरकार आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री अशोक सिंघल को अहसास हो गया है कि यहां-वहां जलापूर्ति पाइप बिछाने के लिए अंधाधुंध तरीके से गड्ढे खोदने से आम लोगों को असुविधा हो रही है। उन्होंने अब ठेकेदारों से कहा है कि वे स्थानीय निवासियों से इस मामले पर चर्चा करने के बाद ही पाइप बिछाने का काम आगे बढ़ाएं।

मंत्री अशोक सिंघल ने आज अटल मिशन फॉर रिजुवेनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) योजनाओं के क्रियान्वयन के संबंध में अधिकारियों और ठेकेदारों के साथ बैठक की। यह योजना राज्य भर के विभिन्न शहरों में क्रियान्वित की जा रही है। बैठक में मंत्री ने जलापूर्ति पाइप बिछाने के लिए गड्ढे खोदने के बाद जीर्णोद्धार कार्य दस दिनों के भीतर पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि बरसात के मौसम में गड्ढे न खोदे जाएं और ऐसी गतिविधियां केवल सर्दियों में ही की जाएं।

सड़कों पर बेतरतीब तरीके से गड्ढे खोदना और जीर्णोद्धार का काम अधूरा रहना लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है और कई दुर्घटनाओं का कारण भी बन रहा है।

राज्य के अन्य शहरों में भी स्थिति काफी खराब है, लेकिन गुवाहाटी में तो और भी बदतर है। जल आपूर्ति, गैस पाइप, दूरसंचार केबल आदि जैसे बुनियादी ढांचे के काम के लिए खाई खोदने के लिए विभिन्न एजेंसियों में होड़ लगी हुई है। गुवाहाटी में हर सड़क पर ऐसा काम चल रहा है, लेकिन जीर्णोद्धार का काम नहीं हो रहा है। कई जगहों पर मिट्टी भरकर खाई को ढक दिया गया है और बारिश में यह मिट्टी बह जाती है, जिससे लोगों के बीच अफरा-तफरी मच जाती है।

पिछले साल राज्य सरकार ने एक पैरेंटल एजेंसी बनाने का विचार किया था, जिससे खाई खोदने की योजना बनाने वाली किसी भी एजेंसी को सलाह लेनी होगी और ऐसी एजेंसी के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही काम करना होगा, लेकिन अभी तक इस निर्णय पर कोई बात नहीं बन पाई है। अशोक सिंघल गुवाहाटी के विकास मंत्री भी हैं और अब समय आ गया है कि वे शहर के लोगों की पीड़ा पर ध्यान दें। उन्हें कम से कम यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जीर्णोद्धार का काम एक निश्चित समय सीमा के भीतर स्थायी रूप से हो जाए, जो अधिकतम दस दिन से अधिक नहीं होनी चाहिए।

अमृत I और II योजनाओं के तहत नगांव, सिलचर और डिब्रूगढ़ शहरों में जलापूर्ति का काम चल रहा है। अमृत ​​द्वितीय के अंतर्गत कुल 24 शहरों को जलापूर्ति योजनाओं के लिए चुना गया है, जिनमें से 13 शहरों में कार्य आदेश पहले ही जारी किए जा चुके हैं। आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री ने आज अमृत के प्रबंध निदेशक को ठेकेदारों के लिए विस्तृत एसओपी विकसित करने का निर्देश दिया, ताकि परियोजना निष्पादन को सुव्यवस्थित किया जा सके और गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

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