मेघालय: गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय से ईडी के अधिकारियों ने सीएमजे विश्वविद्यालय, कुलपति व अन्य के आवासों की तलाशी ली

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने अपने गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय से धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत तलाशी अभियान चलाया।
मेघालय: गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय से ईडी के अधिकारियों ने सीएमजे विश्वविद्यालय, कुलपति व अन्य के आवासों की तलाशी ली
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स्टाफ रिपोर्टर

गुवाहाटी: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों ने अपने गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय से मेसर्स सीएमजे यूनिवर्सिटी, शिलांग और उसके कुलपति चंद्र मोहन झा, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी डिग्री प्रमाण पत्र मामले में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत तलाशी अभियान चलाया। तलाशी में फर्जी डिग्री जारी करने के कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए गए।

ईडी सूत्रों के अनुसार, ये तलाशी सीएमजे यूनिवर्सिटी और सीएमजे फाउंडेशन के कार्यालयों और नई दिल्ली और शिलांग में चांसलर चंद्र मोहन झा के आवासों पर भी ली गई है। कई शिकायतों के आधार पर, मेघालय के राज्यपाल, जो सीएमजे यूनिवर्सिटी के विजिटर थे, ने राज्य सरकार को 2013 में सीएमजे यूनिवर्सिटी को भंग करने का निर्देश दिया था और 2021 में मेघालय उच्च न्यायालय ने भी विघटन को बरकरार रखा था।

ईडी सूत्रों ने बताया कि उसने मेघालय पुलिस द्वारा आईपीसी, 1860 के तहत मेसर्स सीएमजे यूनिवर्सिटी, शिलांग, मेघालय, उसके चांसलर चंद्र मोहन झा, उनके परिवार के सदस्यों, जो मेसर्स सीएमजे फाउंडेशन के ट्रस्टी भी थे, और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर जाँच शुरू की है। इन लोगों पर हजारों छात्रों को पैसे के बदले फर्जी डिग्री प्रमाण पत्र देकर धोखा देने का आरोप है। मेसर्स सीएमजे यूनिवर्सिटी ने अपने बेहद संदिग्ध साख वाले छोटे संकाय के बावजूद करीब 20,570 फर्जी डिग्रियां प्रदान कीं।

ईडी की जाँच से पता चला है कि फर्जी डिग्रियां बेचने के बाद, उनके बैंक खातों में प्राप्त धन को झा परिवार के सदस्यों द्वारा बनाए गए फिक्स्ड डिपॉजिट/बैंक बैलेंस, म्यूचुअल फंड और जीवन बीमा पॉलिसियों के रूप में विभिन्न बैंकों में बैंक खातों में घुमाया गया और वास्तविक लेनदेन का रंग दिया गया। अपराध की आय (पीओसी) को ज़मीन-जायदाद में भी निवेश किया गया।

सूत्रों ने बताया कि जब्त डिजिटल साक्ष्यों से पता चला है कि सीएमजे यूनिवर्सिटी द्वारा वर्ष 2012, 2013 आदि से संबंधित फर्जी डिग्रियाँ अभी भी भारी कीमतों पर बेची जा रही हैं। यह भी पाया गया है कि यूनिवर्सिटी उचित रिकॉर्ड के बिना बहुत ही कम बुनियादी ढाँचे के साथ चल रही है। इसके अलावा, पीएमएलए के तहत तलाशी के दौरान बैंक खातों में 1.53 करोड़ रुपये की अपराध आय पाई गई है, जिसे फ्रीज करने के आदेश दिए गए हैं।

कुल पीओसी 83.52 करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसमें से ईडी ने पहले ही 48.76 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। इस मामले में एक अभियोजन शिकायत पहले ही शिलांग के विशेष न्यायालय (पीएमएलए) में दायर की जा चुकी है। जाँच जारी है।

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