
नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार को चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से जुलाई तक 10,95,209 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं, जो 2025-26 के संबंधित बजट अनुमानों (बीई) का 31.3 प्रतिशत है।
इसमें से 6,61,812 करोड़ रुपये केंद्र को शुद्ध कर राजस्व, 4,03,608 करोड़ रुपये गैर-कर राजस्व और 29,789 करोड़ रुपये गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां हैं।
वित्त मंत्रालय ने बताया कि केंद्र ने इस अवधि के दौरान करों में हिस्सेदारी के रूप में राज्य सरकारों को 4,28,544 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 61,914 करोड़ रुपये अधिक है।
इस अवधि के दौरान केंद्र द्वारा किया गया कुल व्यय 15,63,625 करोड़ रुपये है, जो 2025-26 के संगत बजट अनुमान का 30.9 प्रतिशत है। इस कुल राशि में से 12,16,699 करोड़ रुपये राजस्व खाते में और 3,46,926 करोड़ रुपये पूंजी खाते में हैं, जो बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं पर खर्च किए जाते हैं।
कुल राजस्व व्यय में ब्याज भुगतान 4,46,690 करोड़ रुपये है, जबकि प्रमुख सब्सिडी 1,13,592 करोड़ रुपये है।
राजमार्गों, रेलवे, बंदरगाहों और बिजली क्षेत्रों में बड़ी बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं पर सरकार का पूंजीगत व्यय एक साल पहले के 2.6 लाख करोड़ रुपये की तुलना में 3.5 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है। यह अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है क्योंकि ये बुनियादी ढाँचा परियोजनाएँ विकास दर को बढ़ावा देती हैं और अधिक रोजगार और आय सृजन पर गुणक प्रभाव डालती हैं।
सरकार का राजकोषीय घाटा भी पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित बजट अनुमान के 29.9 प्रतिशत पर नियंत्रण में है।
राजकोषीय घाटे में कमी अर्थव्यवस्था की बुनियाद की मज़बूती को दर्शाती है और मूल्य स्थिरता के साथ विकास का मार्ग प्रशस्त करती है। इससे सरकार की उधारी में कमी आती है, जिससे बैंकिंग क्षेत्र में कॉर्पोरेट और उपभोक्ताओं को ऋण देने के लिए अधिक धनराशि बचती है, जिससे आर्थिक विकास में तेज़ी आती है। कम राजकोषीय घाटा मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने में भी मदद करता है। (आईएएनएस)
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