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केंद्र सरकार की चेतावनी: असम के अलग-थलग क्षेत्रों में आर्सेनिक व भारी धातु प्रदूषण गंभीर

उन्होंने चेतावनी दी कि अनुमेय स्तर से ऊपर आर्सेनिक वाले भूजल का लगातार सेवन विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है।

Sentinel Digital Desk

नई दिल्ली: असम के कुछ अलग-थलग इलाकों में पीने के पानी में आर्सेनिक जैसे भारी धातुओं सहित कई प्रदूषकों की मौजूदगी स्वीकार्य सीमा से अधिक पाई गई है। यह जानकारी केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने गुरुवार को लोकसभा को दी।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई के लिखित प्रश्न के उत्तर में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया कि केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, असम में भूजल सामान्य रूप से पीने के लिए सुरक्षित है।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि राज्य के कुछ क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर निर्धारित मानकों से अधिक दर्ज किया गया है।

मंत्री ने कहा, “कुछ अलग-थलग इलाकों में पीने के पानी के लिए निर्धारित सीमाओं से अधिक आर्सेनिक जैसे भारी धातुओं सहित कुछ प्रदूषकों की स्थानीय स्तर पर मौजूदगी की सूचना मिली है।”

चौधरी ने चेतावनी दी कि निर्धारित सीमा से अधिक आर्सेनिक युक्त भूजल का लंबे समय तक सेवन स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में आर्सेनिक प्रदूषण और बीमारियों की व्यापकता के बीच प्रत्यक्ष संबंध स्थापित करने के लिए अभी और व्यापक अध्ययन की आवश्यकता है।

मंत्री ने बताया कि केंद्रीय भूजल बोर्ड देशभर में अपने राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत मानक संचालन प्रक्रियाओं के अनुसार भूजल की गुणवत्ता की निगरानी और वैज्ञानिक आकलन करता है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि आर्सेनिक प्रदूषण मुख्य रूप से भू-वैज्ञानिक (जियोजेनिक) प्रकृति का होता है, जो मिट्टी और चट्टानों से घुलकर भूजल में पहुंचता है और आगे चलकर खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर सकता है।

जिम्मेदारियों के विभाजन पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा कि चूंकि पानी राज्य सूची का विषय है, इसलिए भूजल प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण की मुख्य जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है।

उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के माध्यम से राज्यों को तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता प्रदान करती है।”

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