गुवाहाटी: मेघालय के पूर्वी जैंतिया हिल्स जिले में एक अवैध कोयला खदान में हुए विस्फोट में मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 25 हो गई। बचाव अभियान जारी है और आशंका जताई जा रही है कि अभी भी कुछ मजदूर खदान के अंदर फंसे हो सकते हैं।
पुलिस के अनुसार, शुक्रवार को सात और मौतों की पुष्टि हुई। इनमें से चार शव खदान स्थल से बरामद किए गए, जबकि गुरुवार को परिजन जिन दो शवों को अपने साथ ले गए थे, उन्हें बाद में औपचारिक कार्रवाई के लिए अस्पताल लाया गया। इसके अलावा, एक घायल मजदूर ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या 25 हो गई।
यह विस्फोट जिले के दूरस्थ इलाके मिंसिनघाट गांव में हुआ, जहां डायनामाइट के इस्तेमाल से हुए धमाके के बाद अवैध खदान में आग लग गई। गुरुवार सुबह ही कम से कम 18 शव बरामद किए गए थे।
पूर्वी जैंतिया हिल्स के पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने एक आधिकारिक बयान में बताया कि अब तक 17 शवों की पहचान की जा चुकी है।
घटना के संबंध में पुलिस ने शुक्रवार को दो लोगों को गिरफ्तार किया है, जिन पर अवैध खदान संचालन और डायनामाइट विस्फोट कराने का आरोप है। आरोपियों की पहचान फॉर्मे चिरमांग और शमेही वार के रूप में हुई है, जो दोनों पूर्वी जैंतिया हिल्स जिले के निवासी हैं।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि स्थानीय अदालत ने दोनों आरोपियों को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और अन्य एजेंसियों की टीमें, लापता परिजनों की जानकारी का इंतजार कर रहे चिंतित परिवारों की मौजूदगी में, खोज और बचाव अभियान में जुटी हुई हैं।
कम से कम पांच घायल मजदूरों को इलाज के लिए पड़ोसी राज्य असम के सिलचर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने गुरुवार को कहा कि डायनामाइट विस्फोट के कारण खदान में आग लगी और उन्होंने इस त्रासदी के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
पुलिस के अनुसार, मृतकों में मेघालय, असम और नेपाल के मजदूर शामिल हैं, हालांकि सभी मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है।
घटना का स्वतः संज्ञान लेते हुए मेघालय हाईकोर्ट ने हादसे के लिए जिम्मेदार सभी लोगों की गिरफ्तारी के निर्देश दिए और जिला प्रशासन व पुलिस से की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट मांगी है।
मेघालय में इससे पहले भी कोयला खदानों में कई घातक हादसे हो चुके हैं। वर्ष 2012 में 15 खनिकों और 2018 में 13 खनिकों की मौत हुई थी। रैट-होल कोयला खनन पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 2014 में प्रतिबंध लगाया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने 2019 में हटाया।
राज्य सरकार ने स्वीकृत कार्ययोजना के तहत पिछले वर्ष से वैज्ञानिक तरीके से कोयला खनन की अनुमति देना शुरू किया है।
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